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WISE MAKES HIS OWN DECISION – OTHERS FOLLOW PUBLIC OPINION

Ellora Kailash Temple Built by Aliens

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10 Pictures facts you must know this Sunday

download (17)--all continents1. Each continent on the earth starts and end with same letter
2.The word Queue is the only word pronounced same as first letterimages--Q
3.The earth we live in is the only planet in solar system not named after a God because human live here .images--earth in solar system
4.Elephant is the only mammal on earth which can not jump.019 - Copy
5.More people are killed by bees than by snakes.

download (11)--Honey bee
6.More number of people are allergic to cow milk than other food.
download (3)--cow milk
7.Pure honey is only food which never spoils.Proved from Egypt Pharaoh tomb.download (3)--pure honey
8.Most of the dust particles on your bed are from dead skin.images--dust of skin
9.The longest flight in time recorded for a chicken is 13 seconds.download (30)
10.It is impossible to sneeze with open eye .download (17)--sneeze with eye

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अनार के पेड़ के फुल,पत्ते,फल का अयुर्बेदिक उपयोग

1. नाक  से  खून  आना  या  नकसीर : इनका रस 1-2 बूंद नाक में टपकाने से या सुंघाने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है। यह नकसीर के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि है। या अनार के फूल और दूर्वा (दूब नामक घास) के मूल रस को निकालकर नाक में डालने और तालु पर लगाने से गर्मी के कारण नाक से निकलने वाले खून का बहाव तत्काल बंद हो जाता है।
2. दांत  से  खून  आना : अनार के फूल छाया में सुखाकर बारीक पीस लेते हैं। इसे मंजन की तरह दिन में 2 या 3 बार दांतों में मलने से दांतों से खून आना बंद होकर दांत मजबूत हो जाते हैं।
3. पेट के कीड़े : अनार के फूल काढ़ा बनाकर  उसमें 1 ग्राम तिल का तेल मिलाकर पीने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
4. अतिसार : अनार की कली 1 ग्राम, बबूल की हरी पत्ती 1 ग्राम, देशी घी में भुनी हुई सौंफ 1 ग्राम, खसखस या पोस्त के दानों की राख आदि 3 ग्राम की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें, फिर इसी चूर्ण को लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में 1 दिन में सुबह, दोपहर और शाम को मां के दूध के साथ पीने से बच्चों का दस्त आना बंद हो जाता है।

5. दांतों के सभी रोग : अनार तथा गुलाब के सूखे फूल, दोनों को पीसकर मंजन करने से मसूढ़ों से पानी आना बंद हो जाता है। केवल अनार की कलियों के चूर्ण का मंजन करने से मसूढ़ों से खून आना बंद हो जाता है।
6. सिर का दर्द : लगभग 20 ग्राम अनार की कली और 10 ग्राम शर्करा को मिलाकर बारीक पीस लें। इस चूर्ण को सूंघने से सिर दर्द ठीक हो जाता है। या अनार के फूलों के रस और आम के बौर के रस को मिलाकर सूंघने से रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) के कारण होने वाला सिर का दर्द ठीक हो जाता है।
7. शरीर में झुर्रियां या मांस का ढीलापन : अनार के पत्ते, छिलका, फूल, कच्चे फल और जड़ की छाल सबको एक समान मात्रा में लेकर, मोटा, पीसकर, दुगना सिरका, तथा 4 गुना गुलाबजल में भिगायें। 4 दिन बाद इसमें सरसों का तेल मिलाकर धीमी आंच पर पकायें। तेल मात्र शेष रहने पर छानकर बोतल में भरकर रख लें। इस तेल को रोज चेहरे या शरीर के अन्य भाग पर मालिश करें तो त्वचा की शिथिलता में इससे लाभ होता है। इसके साथ ही जिनके शरीर में झुर्रियां पड़ गई हों, मांसपेशियां ढीली पड़ गई हो उन्हें भी इस तेल की मालिश से निश्चित लाभ होता है।
pamegranate-flower--Anar Ke Fool

8. माँ बनने में सहायक और प्रदर रोग दूर करे  : अनार की 1-2 ताजी कली पानी में पीसकर पिलाने से, गर्भधारण शक्ति बढ़ती है तथा प्रदर रोग दूर होता है। या प्रदर रोग में अनार के फूलों को मिश्री के साथ पीसकर सेवन करने से लाभ होता है।
9. घाव भरने में : अनार के फूलों की कलियां, जो निकलते ही हवा के झोकों से नीचे गिर पड़ती हैं, इन्हें जलाकर क्षतों (जख्मों, घावों) पर बुरकने से वे शीघ्र ही सूख जाते हैं।
10. बालों को उगाए  : अनार के फूल पानी में पीसकर सिर पर लेप करने से गंजापन दूर हो जाता है।
11. पेशाब की बीमारी अनार की कली, सफेद चंदन की भूसी, वंशलोचन, बबूल का गोंद सभी 10-10 ग्राम, धनिया और मेथी 10-10 ग्राम, कपूर 5 ग्राम। सबको आंवले के थोड़े-से रस में घोट लें। फिर बड़े चने के बराबर की गोलियां बना लें। 2-2 गोली रोज सुबह-शाम पानी से लेने से मूत्ररोग ठीक हो जाता है।

SKILL INDIA CENTRE

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A designated training partner can use the skill India logo following the guidelines as prescribed by the National Skill Development Corporation (NSDC) and …
PMKVY-Marketing-and-Communication-Guidelines (1) Site given bellow gives guide line in pdf for
http://asci-india.com/pdf/PMKVY-…

सहजन (Moringa) के पौष्टिक गुणों की तुलना

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विटामिन सी- संतरे से सात गुना
विटामिन ए- गाजर से चार गुना
कैलशियम- दूध से चार गुना
पोटेशियम- केले से तीन गुना
प्रोटीन- दही की तुलना में तीन गुना
स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी फली, हरी और सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट , प्रोटीन , कैल्शियम , पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए , सी और बी-काम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाई जाती है !

इनका सेवन कर कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है, इसका बॉटेनिकल नाम ‘मोरिगा ओलिफेरा ‘है हिंदी में इसे सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं ! जो लोग इसके बारे में जानते हैं, वे इसका सेवन जरूर करते हैं

सहजन में दूध की तुलना में चार गुना कैल्शियम और दोगुना प्रोटीन पाया जाता है !

ये हैं सहजन के औषधीय गुण सहजन का फूल पेट और कफ रोगों में , इसकी फली वात व उदरशूल में, पत्ती नेत्ररोग , मोच , साइटिका , गठिया आदि में उपयोगी है ! इसकी छाल का सेवन साइटिका , गठिया , लीवर में लाभकारी होता है ! सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात और कफ रोग खत्म हो जाते हैं !

इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, साइटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है ! साइटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है !

मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं और मोच के स्थान पर लगाने से जल्दी ही लाभ मिलने लगता है !
सहजन की सब्जी के फायदे-

सहजन के फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों के दर्द, वायु संचय, वात रोगों में लाभ होता है ! इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है साथ ही इसकी सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है !
.
इसकी जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है ! सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के किड़े निकालता है और उल्टी-दस्त भी रोकता है ! ब्लड प्रेशर और मोटापा कम करने में भी कारगर सहजन का रस सुबह-शाम पीने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है !
इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होनेलगता है ! इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है ! इसके कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होता है इसके अलावा इसकी जड़ के काढ़े को सेंधा नमक और हिंग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है !

इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होते हैं ! पानी के शुद्धिकरण के रूप में कर सकते हैं इस्तेमाल सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है ! इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीसकर पानी में मिलाया जाता है ! पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लेरीफिकेशन एजेंट बन जाता है यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है, बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है !
काढ़ा पीने से क्या-क्या हैं फायदे

कैंसर और पेट आदि के दौरान शरीर के बनी गांठ, फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है यह भी पाया गया है कि यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द), जोड़ों में दर्द, लकवा,दमा, सूजन, पथरी आदि में लाभकारी है !

सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है ! आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से वायरस से होने वाले रोग, जैसे चेचक के होने का खतरा टल जाता है !
शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है !

सहजन में हाई मात्रा में ओलिक एसिड होता है, जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है ! सहजन में विटामिन-सी की मात्रा बहुत होती है ! यह शरीर के कई रोगों से लड़ता है !
सर्दी-जुखाम

यदि सर्दी की वजह से नाक-कान बंद हो चुके हैं तो, आप सहजन को पानी में उबालकर उस पानी का भाप लें ! इससे जकड़न कम होगी !
हड्डियां होती हैं मजबूत

सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं ! इसके अलावा इसमें आइरन, मैग्नीशियम और सीलियम होता है !

इसका जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है, इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है, गर्भवती महिला को इसकी पत्तियों का रस देने से डिलीवरी में आसानी होती है !
सहजन में विटामिन-ए होता है, जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिए प्रयोग किया आता जा रहा है ! इसकी हरी सब्जी को अक्सर खाने से बुढ़ापा दूर रहता है इससे आंखों की रोशनी भी अच्छी होती है ! यदि आप चाहें तो सहजन को सूप के रूप में पी सकते हैं इससे शरीर का खून साफ होता है !
कुछ अन्य उपयोग –

1) . सहजन के फूल उदर रोगों व कफ रोगों में इसकी फली वात व उदरशूल में पत्ती नेत्ररोग, मोच, शियाटिका, गठिया आदि में उपयोगी है।

2) सहजन की जड़ दमा, जलोधर, पथरी,प्लीहा रोग आदि के लिए उपयोगी है तथा छाल का उपयोग साईटिका, गठिया,यकृत आदि रोगों के लिए श्रेयष्कर है !

3) सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर,वातघ्न,रुचिकारक, वेदनाशक, पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है !

4) सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वातए व कफ रोग शांत हो जाते है, इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया, शियाटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है ! साईं टिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है !

5) सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है !
6) सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व बहत्तर प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है !

7) सहजन की सब्जी खाने से पुराने गठिया और जोड़ों के दर्द व वायु संचय, वात रोगों में लाभ होता है !

8) सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है !

9) सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है !

10) सहजन की जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है !

11) सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालता है और उलटी दस्त भी रोकता है !

12) सहजन फली का रस सुबह शाम पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है !

13) सहजन की पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे धीरे कम होने लगता है !

14) सहजन की छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़ें नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है !

15) सहजन के कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है !

16) सहजन की जड़ का काढे को सेंधा नमक और हींग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है !

17) सहजन की पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सुजन ठीक होते है !

18) सहजन के पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाए या इसके बीज घीसकर सूंघे तो सर दर्द दूर हो जाता है !

19) सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है !

20) सहजन में विटामिन सी की मात्रा बहुत होती है ! विटामिन सी शरीर के कई रोगों से लड़ता है खासतौर पर सर्दी जुखाम से ! अगर सर्दी की वजह से नाक कान बंद हो चुके हैं तो आप सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें ! ईससे जकड़न कम होगी !

21) सहजन में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है ! इसके अलावा इसमें आयरन , मैग्नीशियम और सीलियम होता है !

22) सहजन का जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है ! इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है !

23) सहजन में विटामिन ए होता है जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिये प्रयोग किया आता जा रहा है ! इस हरी सब्जी को अक्सर खाने से बुढापा दूर रहता है ! इससे आंखों की रौशनी भी अच्छी होती है !

24) सहजन का सूप पीने से शरीर का रक्त साफ होता है ! पिंपल जैसी समस्याएं तभी सही होंगी जब खून अंदर से साफ होगा !

25) सहजन के बीजों का तेल शिशुओं की मालिश के लिए प्रयोग किया जाता है ! त्वचा साफ करने के लिए सहजन के बीजों का सत्व कॉस्मेटिक उद्योगों में बेहद लोकप्रिय है ! सत्व के जरिए त्वचा की गहराई में छिपे विषैले तत्व बाहर निकाले जा सकते हैं !

26) . सहजन के बीजों का पेस्ट त्वचा के रंग और टोन को साफ रखने में मदद करता है ! मृत त्वचा के पुनर्जीवन के लिए इससे बेहतर कोई रसायन नहीं है ! धूम्रपान के धुएँ और भारी धातुओं के विषैले प्रभावों को दूर करने में सहजन के बीजों के सत्व का प्रयोग सफल साबित हुआ है !

सहजन का अंग्रेजी नाम ड्रमस्टिक,संस्कृत नाम सोभांजना, आयुर्वेद में मोक्षकाद्व और वानस्पतिक नाम मोरिंगा ओलीफेरा (moringa oleifera ) है | सहजन के बारे में काफी वैज्ञानिक खोजे हुई है | और बहुत से परिणाम भी निकाले गए है |

The Arrival of Different Religion on earth in Video depiction

इन 6 गुणों वाला व्यक्ति कभी अमीर नहीं बन सकता,

Diabetes is when blood sugar level of a person becomes too high

  Diabetes is where a person’s blood sugar levels become too high and millions around the world are diagnosed with type 2.
images (48).jpg-Blood Glucose test

This means that their body doesn’t produce enough insulin to keep blood sugar levels down.

Now, according to a new research, a team of scientists have revealed seven warning signs you should see a doctor as soon as possible, to see if you are having Type 2 diabetes..

The seven signs are:

  • Feeling very thirsty
  • Urinating more frequently than usual, particularly at night
  • Feeling very tired
  • Weight loss and loss of muscle bulk
  • Itching around the penis or vagina, or frequent episodes of thrush
  • Cuts or wounds that heal slowly
  • Blurred vision

These symptoms may be more apparent after meals, as per the team.

While symptoms may not seem too serious — and could even be caused by something else — however it is important not to ignore them.

Left untreated, type 2 diabetes could cause problems with the heart, blood vessels, nerves, eyes and kidneys.

What Google knows about your present and past record once you enter into Internet.

  1. History – Here is your entire Google search history.
  2. Ads – Here is what Google thinks what your interests are and shows you ads based on these interests.
  3. Location History – Here are the places where you used Google to do anything.
  4. Takeout – Export every information Google knows about you.
  5. Dashboard – An activity page that tells you about all the Google services you are using.
  6. YouTube search history – YouTube saves all of your searches too.
  7. Permissions – You can see here what permissions you gave to the extensions and sites you use.
    8. Even it can withdraw and deposit in your Bank Account & Block your mobile call. This No 8 is my personal Experience with Proof

Latin,Indian,English list of Ayurvedic herbs

LATIN INDIAN ENGLISH
Asafoetida Hing Asafoetida
Asparagus adescendens Safed Mushali White Asparagus
Asparagus racemosus Shatavri Asparagus
Asphaltum Shiajit Mineral Pitch
Azadlracta Indica Neem Neem
Bambusa arundinacia Vamsha Rochana Bamboo Manna
Berberis arista Daru Haldi Wood Turmeric
Boerhaavi diffuse Punarnav Hog weed
Caryophyllus aromaticus Lavanga Clove
Cinnamomum iners Tejpatra Tamala
Cinnamomum zeylanicum Dalchini Cinnamon
Commiphora mukul Guggulu Guggulu
Convolvolos Pluricaulis Shankpushpi Shankpushpi
Crocus sativus Kesar Saffron
Cumimum cyminum Safed jerra White Cumin
Curcuma longa Haldi Turmeric
Cyperus rotundus Musta Nut Grass
Eclipta alba Bhringraj Eclipta
Ellataria cardamomum Elacihi Cardamon
Embelia ribes Vidanga Embelia
Emblica officinalis Amalaki Indian Gooseberry
Foeniculum vulgare Bari Saunf Fennel
Glycyrrhiza glabra Mulethi Licorice
Hemidesus indicus Anantmool Indian Sarsaparilla
Hydrocotyle asiatic Brahmi Gotu kola
Mucuna pruriens Kaunch Cowhage
Myristica fragrans Jaipha Nutmeg
Nardostachys jatamansl Jaiphal Spikenard
Nelumbo nucifera Kamal bees Lotus seeds
Nigella sativa Kali jerra Black cumin
Ocimum sanctum Tulsi Holy basil
Picrorrhizaq kueeoa Kutki Picrorrhiza
Piper longum Pippli Long pepper
Piper nigrum Kalimirch Black papper
Plumbago zeylanica Chitrak Ceylon Leadwort
Polgonatum officinale Meda Solomon seat
Pterocarpus santalinus Rakta chandana Red sandalwood
Rubia cordifolia Manjishta India Madder
Santalum alba Chandana Sandalwood
Sida cordifolia Bala Country mallow
Swertia chirata Chiraita Indian gentian
Terminalia belerica Bibhitaki Beleric myrobalan
Terminalia chebula Haritaki Chebulic Myrobalan
Tinispora cordifolia Guduchi Amrita
Tribulis terrestris Gokshura Caltrops
Valeriana wallichi Thagara Indian valerian
Withania somnifera Ashwagandtha Winter cherry
Zimages (68)--Gudimages (27)-Nutsingiber offimages (80)-gbcinal-DHATURE KE FOOLe Sunthiimages (27)--cinnamon powder-Neem leave drinkimages (84)images (79)-Honeyimages-neem tree Gingerdownload (9)--Gingerimages (81)--rock salt-powderimages (75)--Ayurvedic Logo

The Aryan

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10Aryan Origins

Photo credit: Ancient Origins

“Aryan” derives from the Sanskrit word arya—a self-designation of the Vedic Indians. The meaning of “Aryan” is not completely understood. Some believe that it means “noble” or “pure.” Lacking racial connotations, arya referred to a cultural quality venerated in the sacred Sanskrit text.

Confusion over the word developed in the 19th century when “Aryan” shifted to a noun. Scholars incorrectly assumed that “Aryan” was a term used to describe the ancestors of all Indo-European people. German nationalists imbued this term with racial baggage—placing themselves at the top of the racial hierarchy and making themselves the rightful inheritors of all the sacred Sanskrit texts.

The term sunk further into the morass when scholars determined that the original homeland.

For decades, scholars believed that the Aryan migration to the subcontinent was one of conquest. Glorious charioteers crossed the Hindu Kush and steamrolled over the “inferior” Dravidian culture. For many, it was a clear indication of the superiority of the Aryan civilization. However, it turns out that the image is just plain wrong.

The Indus Valley Civilization was one of the most sophisticated of the ancient world. The first evidence of religious rites goes back to 5500 BC. Farming communities developed around 4000 BC, with urbanization (including a complex underground system of drains) occurring around 2500 BC.

However, around 1800 BC, the life-giving rivers began to shift. The Saraswati River either dried up or became prone to cataclysmic flooding. The agriculture of the region began to fail along with civic order. The nomadic cattle-herding Aryans of Central Asia entered northern India to find it largely abandoned.[2] They merely occupied a vacuum left by the Dravidians.

8Genetic Signature Of The Aryans

Photo credit: thehindu.com

In 2011, researchers from Hyderabad’s Center for Cellular and Molecular Biology declared that the Aryan migration was a myth. According Dr. Lalji Singh, “There is no genetic evidence the Indo-Aryans invaded or migrated to India or even something such as Aryans existed.”

It turns out that they were looking in the wrong place. Earlier this year, researchers published an article in the journal BMC Evolutionary Biology that stated: “Genetic influence from Central Asia in the Bronze Age was strongly male-driven.”

Previous Indian genetic studies focused only on mtDNA inherited from mothers. The recent study focused on male Y-chromosomes. They discovered that 17.5 percent of Indian male lineage belongs to the R1a haplogroup.

Geneticists believe this genetic signature emerged on the Pontic-Caspian steppe and spread across Central Asia, Europe, and South Asia between 5,000 and 3,500 years ago. Researchers believe that Central Asians arrived in India bringing R1a and the Indo-European language.[3]

7Mein Kampf’s Misinformation

Photo via Wikimedia

While imprisoned for a failed coup, Adolf Hitler dictated Mein Kampf. The manifesto became the de facto Nazi Bible. By the dawn of World War II, it had sold five million copies and been translated into 11 languages.

A central theme is the superiority of the German race, which Hitler refers to as “Aryan.” The Aryan mythology provided Hitler with a powerful motivation: restore the glory of the Germanic people and expand into Russia, the Aryan homeland.[4]

The origin of Hitler’s incorrect assumption began in the late 18th century. Fascinated by the connections between Sanskrit and local tongues, European linguists invented a mythic race called the “Indo-Aryans,” the common ancestor of Indians and Europeans.

The Aryan homeland was believed to be in the Caucasus Mountains, from where the term “Caucasian” derives. European scholars incorrectly perceived themselves as the inheritors of Sanskrit civilization and assumed that Germanic people were the Aryans’ ultimate manifestation.

6Language Of The Aryans

Photo via Wikimedia

Sanskrit is the sacred language of Hinduism. Many believe that it arrived with Central Asian cattle herders who appeared in the subcontinent during the Bronze Age. According to legend, the god Brahma created Sanskrit and gifted it to the sages. By the second millennium BC, the tongue had been crystallized in written form in the collection of sacred hymns known as the Rig Veda.

During colonial rule, Europeans quickly noticed the similarities between Sanskrit and French, English, Russian, and Farsi. A theory developed that they were all the descendants of an ancient language known as Indo-European.[5]

As the languages of South India are derived from the Dravidian language family and not Indo-European, British archaeologist Mortimer Wheeler proposed the “Aryan invasion” theory. This stated that Central Asian nomads swept into the subcontinent sometime in the Bronze Age, caused the collapse of the Indus Valley Civilization, and emerged as the culturally dominant force in the area.

5The Last Pure Aryans

Photo credit: aljazeera.com

Hidden away in Kashmir’s Himalayan highlands, the Brogpas claim to be the last pure Aryans. Cloistered in a few villages at a 3,000-meter (10,000 ft) elevation in the Aryan Valley, the Brogpas have remained isolated culturally and genetically for centuries.

In the past, visitors were unwelcome and outside marriages were strictly prohibited. Endogamy and oral tradition preserved what some believe are “archaic traits of the Aryan ancestors.” In 2010, the Indian government made a push to open these mountain villages to tourists.

The Brogpas are generally taller than their Tibeto-Mongolian neighbors and have Mediterranean features and fair skin—with occasional blond hair and light eyes. Their origin remains unknown.

One legend holds that they are the remnants of Alexander the Great’s army. In 2007, filmmaker Sanjeev Sivan released The Achtung Baby: In Search of Purity. The documentary follows German women who seek to become impregnated by the “pure Aryans” of the Himalayan highlands.[6]

4The Caste System

Photo credit: factsanddetails.com

Oral tradition traces the origin of India’s caste system to the arrival of Aryans into the subcontinent around 1500 BC. Scholars have long believed that the system of class hierarchy was set in place to formalize relationships between the new arrivals and the indigenous inhabitants, whom they considered inferior. The usage of the words “Dasas” or “Dasyi,” both of which translate to “slaves,” suggests that the system may have grown out of an enslavement of the region’s indigenous inhabitants.

The caste system is composed of four classifications based on occupation. Brahmins (priests) occupy the top. Following them are the Kshatryias (warriors). Below them are the merchants and farmers known as Vaishyas. At the bottom of the pyramid are the Sudras (laborers).

The Indian word for caste is varna (“color”). This lends credence to the fact that the lighter-skinned Aryans used this system as a means to oppress the region’s darker aboriginal inhabitants.

3Unearthed Aryan Cities

Photo credit: ancient-code.com

In 2010, Russian archaeologists announced the discovery of ancient Aryan cities on the southern Siberian steppe. Dated to 4,000 years ago, these 20 spiral-shaped settlements rival the size of Greek city-states and were each designed to house 1,000–2,000 individuals. The cities were first explored over two decades ago. However, their remote locations have made them virtually unknown until recently.

Experts believe that there may be as many as 50 more settlements to be discovered. Along with evidence of structures, researchers also unearthed equipment, chariots, horse burials, and pottery. Swastikas cloak many of the objects. This ancient symbol of the Sun and eternal life was long associated with the Aryans before its appropriation by the Nazis.

While these settlements are definitely Indo-European, there is no direct evidence that these were the individuals who went on to settle northern India. The usage of “Aryan” in this context carries significant social and political implications.[8]

2Aryan Iran

Photo credit: craighill.net

In 1935, Reza Shah Pahlavi officially requested foreign delegates to use the name for his country instead of the traditional name Persia. Many believe that the name “Iran” means “Land of the Aryans.” The name originally derives from the Old Persian word arya or ariya, which was a self-designation of the Indo-European–speaking inhabitants of the area. This is a cognate for the Sanskrit word arya from which “Aryan” emerges.

In 1862, scholar Max Muller claimed that “Iran” means “Aryan expanse.” However, the racial connotations of this reflect a fundamental lack of understanding. In Old Persian, arya referred to speakers of a language, not a race.[9]

According to historian Gherardo Gnoli, ariya was not an ethnicity but a term used to connote a king’s legitimacy. The closest translation would be “noble.” He states that the term “Airyanem Vaejah”—from which the name “Iran” derives—is actually a “cosmogonic concept” from Zoroastrianism.

1Aryan Homeland

Photo credit: Deingel

After long debate about the location of the Aryan homeland, scholars now look to the steppe between the Black and Caspian Seas. Experts refer to the Bronze Age culture of Central Asian pastoralists as the Yamnaya. With their wheeled chariots, pit graves, and Indo-European language, the Yamnaya spread their culture and genes east and west.

There is no definitive archaeological evidence to connect the Yamnaya to the subcontinent. Elsewhere, pit graves and ceramics provide clear signs of these pastoralists. However, in India, archaeological remains from the cultural transition between the Indus Valley Civilization and the Vedic era are scant.

It would be a mistake to refer to the Yamnaya as Aryans. At this time, it is impossible to say whether these Central Asian nomads were the ones who brought Indo-European culture to the subcontinent. However, it does point to the Pontic-Caspian steppe as the birthplace of Indo-European languages and culture.

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